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मेरे गणतंत्र को क्रिकेट बचायेगा या क्रांति!

देश व गणतंत्र की सुरक्षा को भारतीय नेताओं, सांसदो तथा नवयुवकों ने तिरोहित कर दिया है। गणतंत्र की सुरक्षा के प्रति बढती उदासीनता बडी चिंता का विषय बनती जा रही है। शायद इन नेताओं, सांसदो व नवयुवकों को पता ही ना हो कि जम्मू कश्मीर व अन्य पहाडी इलाकों तथा बांग्लादेश के निकट 80 हजार से अधिक पाक सैनिक आतंकी तथा आतंकी संगठनों की गतिविधियां निरंतर चल रही हैं। जबकि हमारे देश के कर्णधार क्रिकेट का आनंद ले रहे हैं तथा क्रिकेट के माध्यम से पाक व भारत के रिश्तों को सुधारने का दावा कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत शीघ्र स्वतंत्र तो हो जायेगा मगर आने वाले समय में अनेक कठिन परिस्थितियों से घिर जायेगा। उनका तात्पर्य कानून व्यवस्था, पडौसी संबंधो तथा राजनेताओं की कार्यप्रणाली की और था। दूसरी बात कही थी कि भारत में भी रूस जैसी श्रमिक क्रांति होगी। क्योंकि दोनों ही कृषि प्रधान देश हैं। मगर आज भारत में किसानों की जो दशा है वह किसी से भी छुपी हुई नहीं है। विवेकानंद का भारत के प्रति अध्ययन व अंर्तदृष्टि बहुत गहन थी। इसलिये यह बात कही थी। आज भारत वैश्विक शक्तियों में छलांग लगाने को तत्पर है, किंतु नेतृत्व के संकट ने देश और उसके जोश को कमजोर कर दिया है। उसके कुछ प्रमुख कारण मेरी राय में ये हैं, जिन्हे गणतंत्र के प्रत्येक नागरिकों व नेतागणों को समझना होगा- वर्तमान समय में हुए अपूर्व भ्रष्टाचार, आंतरिक व बाहरी रूप से विदिर्ण सुरक्षा तंत्र, विदेश नीति में अति सहिष्णुता, असमान आर्थिक विकास, सांप्रदायिकता की कटटरता, जातिवाद की प्रबलता, आतंकवाद, सीमावाद, आरक्षण की पीडादायक धारणा, देशभक्ति व गौरव का विस्मरण व चरित्र में गिरावट। इन सब समस्याओं से भारत पूर्णतया घिर चुका है । फिर भले ही अपने मुंह मिंया मिठठू बनने की भूल हम क्यों न करते रहें कि सारे जंहा से अच्छा हिंदुस्ता हमारा । भारत को यदि शिखर पर फिर से ले जाना है तो विवेकानंद के आदर्श व ज्ञान को स्वीकारना होगा। उनके बारे में विख्यात फ्रेंच लेखक रोमां रोलां ने कहा था कि विवेकानंद आयु के कम मगर ज्ञान में असीम थे। यदि इस उक्ति को ध्यान में रखें तो अब समय आ गया है कि भारत के गणतंत्र की बागडोर युवा वर्ग को ही सौंप देनी चाहिये । क्योंकि हम सब जानतें हैं कि समाज नेतृत्व चाहे विधा बल, धन बल, और चाहे जो बल हो, उसका आधार आमजन गण के आधार पर ही टिका है। हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि यथार्थ भारत झोंपडी में रहता है, बसता है इसीलिये भारत की उन्नति हेतु झोपडियों में रहने वाले आमजन की रक्षा रखनी चाहिये उनकी उन्नति की और विशेष ध्यान देना चाहिये। यह ध्यान रखिये कि आम जनता की उपेक्षा से हमारे गणतंत्र का पतन हो सकता है। गणतंत्र के रक्षकों का यह प्रथम कर्तव्य होना चाहिये कि वे सबसे पहले आमजन की समस्याओं का हल निकालें और उन्हे दूर करें। हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि हमारा इतिहास क्या रहा है। क्योंकि अतीत से ही भविष्य बनता है और वर्तमान से भविष्य आगे बढता है । हम, हमारे नेतागण, अधिकारी वर्ग हमारे भारत के गौरवशाली अतीत का जितना अध्ययन करेंगे, हमारा भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। गांधी जी से भी बहुत बडी भूल हुई और नेहरू जी से भी दो बहुत बडी गलतियां हुई, उनको अब वर्णन करने से वे सुधरने वाली नहीं। देखना यह चाहिये कि क्रिकेट से पडौसी देशों से संबंध नहीं सुधरने वाले बल्कि वे हमें इस और उलझा कर कब हम पर आतंकी हमला कर दे पता भी न चलेगा। हमें विदेशों से अपने देश की रक्षा कैसे की जाती है यह सीखना चाहिये। और यह कभी नहीं भूलना चाहिये कि पडोसी देश तो बहुत छोटे हैं हमारा क्या कर लेंगे। आज हमें सच्चे देशभक्तों, देशभक्त नवयुवकों की टोली चाहिये जो स्वतंत्रता से पूर्व अपना तन मन धन सब कुछ अर्पण करने को सदैव तत्पर रहते थे। आज भी वैसे ही वातावरण की आवश्यकता है। हमने अभी अपनी स्वतंत्रता की पहली सीढी पार की है, अभी पडौसी देशों ने हमारी नींद हराम कर दी है, हमें अपने गणतंत्र की रक्षार्थ अपनी शक्ति व्यर्थ की बातों, आंदोलनो, बंद आदि में नहीं क्षय करनी है। हमारे गणतंत्र की दुर्दशा के निवारण हेतु कोई यथार्थ कर्तव्य पथ तलाशना चाहिये। मेरी ऐसी मान्यता है कि एक हजार युवा व एक हजार तेजस्वी युवतियां मिल जाएं जो सच में देशहित में कार्य कर गणतंत्र की रक्षा कर सकते हैं तो सिहं की तरह आईए और त्याग, सेवा, निश्छलता, जाति पांति से रहित हो कर देश के उत्थान में लग जाइये। यत्र नार्येस्तु पूज्यन्ते रमयन्ते तत्र देवता का आदर्श वर्तमान की घटना को देखकर लगता है समाप्त सा होता जा रहा है। इस मानसिकता को बदलना होगा। नारी को सम्मान देना ही होगा। सत्य यह है कि उत्तर पूर्वी राज्यों में हमारे सैनिक हताशा में जी रहे हैं। रक्षा में असफल हो गये हैं। आज पाक चीन और बंगलादेश मिल कर हमारे गणतंत्र को जीर्ण शीर्ण करने में लगे हुए हैं। आतंकी जेहादी संगठनों में तालमेल चल रहा है । आने वाले समय में यह भय सता रहा है कि ये नेतागण हमारे भारत का कौनसा स्वरूप छोड कर जायेगें। क्या भारत ऐसा ही रहेगा या आने वाले समय में इसका इतिहास व भूगोल सब कुछ बदल जायेगा। कहीं ऐसा न हो कि हम सब क्रिकेट का लुत्फ उठाते ही रह जायें और हमारे भारत का इतिहास ही बदल जाये। अत: पूर्व की बातों को ध्यान में रख कर पुन: एक महान क्रांति की आवश्यकता है। अब तो लगने भी लगा है कि एक इंकलाब व क्रांति कि फिर से आवश्यकता है। -कृपाशंकर तिवारी (आरईएस)

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