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किंडरगार्टेन!

पूर्व प्राथमिक शिक्षा विकसित एंव विकासशील देशों में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पूर्ण अंग है। रूस, फ्रांस, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का ढांचा वहां की आवश्यकता के अनुरूप खडा किया गया है। अधिकांश 2 से 7 साल तक के बच्चे इन देशों में पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में जाते हैं। भारत में इस तरह का कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम आजादी के 63 सालों बाद तक भी हम नहीं बना पाये हैं!
हमारे जैसा हाल जर्मन का 1780 के आस पास था। जर्मनी में उस समय शिशुओं के लिये कोई शिक्षा व्यवस्था नहीं थी। 1837 में ब्लैकनबर्ग में एक जर्मन अर्थशास्त्री  जान फ्रैड्रिच बिल्हैम ऑगस्ट फ्रॉबेल ने किंडरगार्टेन के नाम से एक शिक्षा पद्धति की स्थापना की। जर्मन भाषा में किंडरगार्टेन का अर्थ होता है बच्चों का बाग! 21 अप्रेल, 1783 में ओवर बेसवाक में जन्में, अल्पायु में मां-बाप के लाड-दुलार से वंचित हुए, शैशवकाल को आंसुओं के समुद्र में भिगोकर बडे हुए फ्रॉबेल ने जो शिक्षा पद्धति किंडरगार्टेन के नाम से जर्मनी को दी उसके पीछे जीवन के अनेकों कडवे-मीठे अनुभव थे।
'फ्रॉबेलÓ चाहते थे कि बालक बिना किसी नियंत्रण के अपनी रूचि के अनुरूप खुले वातावरण में अपनी शारीरिक, मानसिक एवं अन्य सभी क्रियाएं करे। खेल के माध्यम से उसका सर्वांगीण विकास हो, क्यूंकि फ्रॉबेल ने अपने अतीत से जो कुछ सीखा था, उससे उनकी विचारधारा में क्रांतिकारी परिवर्तन आया था। वे आदर्शवादी थे, उन पर कांट, फिक्टे, हीगने जैसे विद्वानों का प्रभाव था। वे बालक के क्रमिक विकास के सिद्धांत पर विश्वास करते थे । बालक के व्यक्तिगत सर्वांगीण विकास के साथ-साथ ही वे उन्हे सामूहिक शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहते थे। भिन्नता में एकता पर उन्हें विश्वास था । लेकिन जर्मन सरकार ने फ्रॉबेल के विचारों को क्रांतिकारी माना और देश के सभी किंडरगार्टेन बंद करवा दिये गये । इस गहरे आघात को फ्रॉबेल सहन नहीं कर पाये और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और शिक्षा शास्त्री सुधारक फ्रॉबेल का 1852 में देहान्त हो गया!
भारत में इस शिक्षा पद्धति के नाम पर सैंकडों स्कूल चल रहे हैं। राजस्थान में जितने भी स्कूल हैं अधिकांश में केजी कक्षाएं हैं, लेकिन इन स्कूलों के प्रबंधकों, अध्यापकों को इस शिक्षा पद्धति के बारे में शून्य से अधिक जानकारी नहीं है। इस विधि को इन नीमहकीमों ने कहीं नर्सरी विधा से, तो कहीं बालवाडियों से जोड दिया है और कहीं मांटेसरी बालघर से, जबकि ये चारों विधियां ही अलग-अलग हैं।
रूस व चीन ने किंडरगार्टेन पद्धति पर आधारित अपने देश की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा विधि का विकास किया है। रूस में यह विधि 1944 से लागू है वहीं चीन ने अपने यहां 1949 में लागू की है जो सफलतापूर्वक चल रही है। -श्रीमती पारस जैन

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