जयपुर (ओएनएस) राजस्थान की तेरहवीं विधानसभा का बजट सत्र गुरूवार से शुरू हो गया। सत्र की शुरूआत राज्यपाल माग्र्रेट आल्वा के अभिभाषण से हुई। उन्होंने अपना पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ा और उसे पढ़ा हुआ मान लिया गया। यह कार्यवाही आठ मिनट में ही पूरी हो गई।
राज्यपाल के बजट अभिभाषण को अंग्रेजी में पढ़े जाने को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। प्रतिपक्ष ने इसका विरोध किया और अभिभाषण हिंदी में पढ़ने की मांग की। सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के पास बैठे भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान एक हिंदी भाषी प्रदेश है और यहां पर अंग्रेजी में अभिभाषण पढ़ा जाना आमजन का अपमान होगा।
तिवाड़ी ने आगे कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण का एक पैरा हिंदी में पढ़ दें,शेष भाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाएगा। इसके बाद कम्यूनिस्ट पार्टी के अमराराम ने कहा कि राज्य सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। लाखों मजदूर हड़ताल पर हैं, फिर भी सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। प्रदेश में पानी, बिजली की स्थिति भयावह है और आमजन त्रस्त है।
अमराराम के इस तरह से बोलने पर सत्तापक्ष के विधायकों ने विरोध किया और अध्यक्ष से उन्हें बैठाने की मांग की। हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपने अभिभाषण का एक पैरा हिंदी में पढ़ा और शेष अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लेने को कहा।
राज्यपाल के बजट अभिभाषण को अंग्रेजी में पढ़े जाने को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। प्रतिपक्ष ने इसका विरोध किया और अभिभाषण हिंदी में पढ़ने की मांग की। सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के पास बैठे भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान एक हिंदी भाषी प्रदेश है और यहां पर अंग्रेजी में अभिभाषण पढ़ा जाना आमजन का अपमान होगा।
तिवाड़ी ने आगे कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण का एक पैरा हिंदी में पढ़ दें,शेष भाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाएगा। इसके बाद कम्यूनिस्ट पार्टी के अमराराम ने कहा कि राज्य सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। लाखों मजदूर हड़ताल पर हैं, फिर भी सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। प्रदेश में पानी, बिजली की स्थिति भयावह है और आमजन त्रस्त है।
अमराराम के इस तरह से बोलने पर सत्तापक्ष के विधायकों ने विरोध किया और अध्यक्ष से उन्हें बैठाने की मांग की। हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपने अभिभाषण का एक पैरा हिंदी में पढ़ा और शेष अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लेने को कहा।



