क्यों सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और सरकारी आदेशों का उलंघन कर रहे हैं? बताओ हुजूरों!
जयपुर (ओएनएस) जयपुर नगर निगम के मेयर, सीईओ, जोन आयुक्त एवं उनके अधीनस्थ अफसरों और कारिन्दों की गैरजुम्मेदारान लापरवाही के चलते सुप्रीम कोर्ट की एम्पावर्ड कमेटी तो बेबस है ही, राज्य के नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव के आदेशों की भी जयपुर नगर निगम के भ्रष्ट और नाकारा अफसर धज्जियां उड़ा रहे हैं और राज्य के स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इन भ्रष्ट अफसरों की करतूतों को तमाशबीन की तरह देख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि लेखराज सोनी बनाम जयपुर नगर निगम मामले में निगम की ओर से जयपुर को वल्र्ड क्लास सिटी बनाने का काल्पनिक खाका सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा गया था। उसी के आधार पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत दो न्यायाधीशों की एक कमेटी बनाई गई और उसे जिम्मेदारी दी गई कि वह सरकार के फाइनल प्लान का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ-साथ चारदीवारी वाले ऐतिहासिक शहर में साफ-सफाई, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किग, जनसुविधाओं और पूरे जयपुर रीजन में (जेडीए, नगर निगम व हाउसिंग बोर्ड के अधीन) सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण व अतिक्रमणों पर भी गौर करे। आम नागरिकों की शिकायतों व सुझावों पर संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगकर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की सिफारिश करे, सरकार को सुधार के निर्देश दे। वल्र्ड क्लास सिटी के कांसेप्ट पर विभागों में सामंजस्य बनाने के लिए कमेटी ने दौरे तो कई किए, कई निर्देश भी दिए, लेकिन अफसरों पर उनका कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि जयपुर नगर निगम की मेयर, सीईओ और इनके अधीनस्थ जोन आयुक्तों एवं सम्बन्धित अफसरों-कारिंदों की मिलीभगत से जयपुर नगर निगम के चार दिवारी क्षेत्र में तंग गलियों में भी आवासीय स्थलों में गैर कानूनी तरीके से अवैध मल्टीस्टोरी कॉमर्शियल काम्प्लेक्स भारी तादाद में बन गये हैं और अभी भी पचास से अधिक अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माणाधीन हैं।
सूत्र बताते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने एम्पावर्ड कमेटी बनाते समय राज्य सरकार, जयपुर नगर निगम एवं अन्य ऐजेन्सियों को अहम निर्देश दिये थे कि किसी भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और किसी भी ऐसे भवन का नियमन न किया जाए, जो मास्टर प्लान, जोनल प्लान व स्वीकृत बिल्डिंग प्लान की शर्तो के खिलाफ बनाया गया हो।
लेकिन जयपुर नगर निगम के आधीन खास कर चार दिवारी क्षेत्र में बिल्डरों और भू-माफियाओं ने बिना इजाजत गैर कानूनी तरीके से आवासीय क्षेत्र में भारी तादाद में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण कर लिया गया है और अभी भी पचास से अधिक गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स शहर की चार दिवारी क्षेत्र में निगम के अफसरों-कारिंदों की मिलीभगत से निर्माणाधीन हैं, लेकिन जयपुर नगर निगम की मेयर, सीईओ ओर सम्बन्धित जोन आयुक्त एवं उनके कारिंदे सन्नीपात में जकड़े-अकड़े तमाशबीन बने बैठे हैं।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड़ हीराचंद जैन ने यहां बताया कि चार दिवारी क्षेत्र में जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व और हवामहल जोन पश्चिम में बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की विस्तृत जानकारी इन जोन आयुक्तों को दिये जाने के बाद भी सीईओ जगरूप सिंह यादव की शह पर जोन आयुक्तों और सर्तकता आयुक्त तथा निदेशक विधि के बीच फाइलों को इधर से उधर करने से ज्यादा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
फारवर्ड ब्लाक का सीधा-सीधा आरोप है कि अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण सम्बन्धि सारा रेकार्ड जयपुर नगर निगम मुख्यालय ओर जोन मुख्यालय के दफ्तरों में उपलब्ध है और राज्य सरकार द्वारा अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के खिलाफ कार्यवाही के स्पष्ट निर्देश भी हैं।
राजस्थान के नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन सचिव गुरदयाल सिंह संधु द्वारा जारी प्रपत्र क्रमांक प.10 (54) नविवि/3/2005 पार्ट दिनांक 13 जून, 2012 में उल्लेखित आदेशों का क्यों जानबूझ कर उलंघन कर रहे हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि-
आवासीय भूखण्डों पर बिना पूर्वानुमति के गैर आवासिय उपयोग किसी दशा में नहीं होने दिया जाये। इसके लिये नगरीय निकायों के संबंधित प्रवर्तन अधिकारी/जोन अधिकारी/नगर पालिका अधिकारी उत्तरदायी होंगे एवं सम्बन्धित संस्था के कार्यालय अध्यक्ष का भी पर्यवेक्षकीय उत्तरदायित्व होगा। यदि बिना स्वीकृति के आवासीय भूखण्ड का उपयोग गैर आवासीय प्रयोजनार्थ किया जाता है तो उसे रोका जाकर भवन को सील किये जाने की कार्यवाही की जायेगी तथा भूखण्ड के बाहर नगरीय निकाय द्वारा एक पट्टिका लगवायी जायेगी जिस पर अंकित होगा ''यह भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र अनाधिकृत/अवैध निर्माण घोषित किया गया है। समस्त आमजन को सूचित किया जाता है कि इस भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र को अथवा किसी भाग को क्रय अथवा उपयोग नहीं करें।ÓÓ संबंधित नगर निकाय का नाम।
यही नहीं सर्वोच्च न्यायालय एवं राजस्थान हाईकोर्ट के भी स्पष्ट निर्देश रेकार्ड पर उपलब्ध होने के बावजूद जयपुर नगर निगम के सीईओ, जोन आयुक्तों, सतर्कता आयुक्त द्वारा कार्यवाही नहीं करने से साफ जाहिर होता है कि जयपुर नगर निगम के इन अफसरों और बिल्डरों, भू-माफियाओं के बीच गहरी सांठ-गांठ और मोटे लेनदेन के चलते अवैध निर्माणों और निर्माणकर्ताओं पर कार्यवाही नहीं हो रही है।
फारवर्ड ब्लाक के स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने चेतावनी दी है कि अगर बिल्डरों और भू-माफियाओं के खिलाफ जयपुर नगर निगम के अफसरों ने स्थापित कानूनों के तहत तत्काल कार्यवाही नहीं की तो फारवर्ड ब्लाक उन अफसरों और उनके मातहतों के नाम सार्वजनिक करेगा, जिनके कारण अवैध कॉमर्शियल कामप्लेक्सों का निर्माण हो रहा है।



