जयपुर (ओएनएस) नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शांति धारीवाल ने अधिकारियों से कहा है कि किसी को पट्टा देने पर कोई रोक नहीं है। अगर किसी ने मकान के साथ दुकान बना रखी है तो उसे मत देखो, पट्टा जारी कर दो, क्योंकि पट्टा भूखंड का दिया जा रहा है। जब वह व्यक्ति इसे वाणिज्यिक कराने आएगा तब देखेंगे कि क्या करना है।
अगर बाद में कोई गड़बड़ी सामने आई तो उसे निरस्त कर देंगे। धारीवाल बुधवार को यहां महावीर स्कूल में आयोजित प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षात्मक कार्यशाला में प्रदेशभर से आए स्वायत्तशाषी संस्थाओं के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने आजादी के 65 साल बाद पहली बार नियमों में ऐसी छूट दी है और किसी को पट्टा देने से नहीं रोका जा सकता।
धारीवाल ने कहा कि पहले अभियान 25 दिसंबर तक था, अब इसे 15 फरवरी तक बढ़ा दिया गया है।
इस दौरान अगर किसी निकाय में आगे के लिए कार्यक्रम का चार्ट नहीं बना है तो इसे तैयार कर लें और हर हाल में 7 जनवरी तक अभियान के लिए शिविर शुरू कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अभियान के मामले में आदेशों की अवहेलना करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के साथ सरकार सख्ती से पेश आएगी।
उन्होंने कहा कि अधिकारी इसके लिए सरकार को मजबूर नहीं करें। उन्होंने यह भी व्यवस्था दी कि अगर किसी निकाय में चेयरमैन पट्टे पर हस्ताक्षर करने से आनाकानी करे या अनावश्यक विलंब करे तो वहां संबंधित अधिकारी 24 घंटे के बाद पट्टे जारी कर दें।
धारीवाल ने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रदेश में स्टेट ग्रांट के 10,000 पट्टे ही जारी किए गए है, जबकि इनकी संख्या ज्यादा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि लगता है इस संबंध में जारी आदेशों को अधिकारी समझ नहीं पाए हैं। इसमें 40 साल के रहवास होना जरूरी है। इसकी पुष्टि के लिए इंजीनियरों से मौका रिपोर्ट करवाई जा सकती है। इसके लिए दस्तावेजों की जांच की जा सकती है या दो ऐसे लोगों की गवाही ली जा सकती है, जो 60 साल से ज्यादा उम्र के हों। इसके लिए सर्कुलर में भी संशोधन कर दिया गया है।
स्टेट ग्रांट के पट्टे देते समय इस बात पर दौर नहीं किया जाए कि मौके पर मकान है या दुकान, क्योंकि पट्टा तो भूमि का दिया जा रहा है, बाद में इस मसले को देख लेंगे। उन्होंने कहा कि उन कच्ची बस्तियों में पट्टे जारी नहीं किए जाए, जिनका पुनर्वास पीपीपी मॉडल पर किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि किसी खातेदारी भूमि में बसी कॉलोनी के लिए शिविर लग चुका है, लेकिन कोई व्यक्ति अब पट्टे की मांग कर रहा है तो उसे भी प्री कैंप मानते हुए पट्टा जारी कर दिया जाए।
ज्ञातव्य रहे कि आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों पर सर्वोच्च न्यायालय और राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करना अब अधिकारियों की मजबूरी हो गई है। मंत्री के आदेशों से आने वाले समय में आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के डीएलबी के आदेशों की भी हवा निकलती दिख रही है और नये विवादों का खड़ा होना लगभग तय है।
अगर बाद में कोई गड़बड़ी सामने आई तो उसे निरस्त कर देंगे। धारीवाल बुधवार को यहां महावीर स्कूल में आयोजित प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षात्मक कार्यशाला में प्रदेशभर से आए स्वायत्तशाषी संस्थाओं के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने आजादी के 65 साल बाद पहली बार नियमों में ऐसी छूट दी है और किसी को पट्टा देने से नहीं रोका जा सकता।
धारीवाल ने कहा कि पहले अभियान 25 दिसंबर तक था, अब इसे 15 फरवरी तक बढ़ा दिया गया है।
इस दौरान अगर किसी निकाय में आगे के लिए कार्यक्रम का चार्ट नहीं बना है तो इसे तैयार कर लें और हर हाल में 7 जनवरी तक अभियान के लिए शिविर शुरू कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अभियान के मामले में आदेशों की अवहेलना करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के साथ सरकार सख्ती से पेश आएगी।
उन्होंने कहा कि अधिकारी इसके लिए सरकार को मजबूर नहीं करें। उन्होंने यह भी व्यवस्था दी कि अगर किसी निकाय में चेयरमैन पट्टे पर हस्ताक्षर करने से आनाकानी करे या अनावश्यक विलंब करे तो वहां संबंधित अधिकारी 24 घंटे के बाद पट्टे जारी कर दें।
धारीवाल ने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रदेश में स्टेट ग्रांट के 10,000 पट्टे ही जारी किए गए है, जबकि इनकी संख्या ज्यादा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि लगता है इस संबंध में जारी आदेशों को अधिकारी समझ नहीं पाए हैं। इसमें 40 साल के रहवास होना जरूरी है। इसकी पुष्टि के लिए इंजीनियरों से मौका रिपोर्ट करवाई जा सकती है। इसके लिए दस्तावेजों की जांच की जा सकती है या दो ऐसे लोगों की गवाही ली जा सकती है, जो 60 साल से ज्यादा उम्र के हों। इसके लिए सर्कुलर में भी संशोधन कर दिया गया है।
स्टेट ग्रांट के पट्टे देते समय इस बात पर दौर नहीं किया जाए कि मौके पर मकान है या दुकान, क्योंकि पट्टा तो भूमि का दिया जा रहा है, बाद में इस मसले को देख लेंगे। उन्होंने कहा कि उन कच्ची बस्तियों में पट्टे जारी नहीं किए जाए, जिनका पुनर्वास पीपीपी मॉडल पर किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि किसी खातेदारी भूमि में बसी कॉलोनी के लिए शिविर लग चुका है, लेकिन कोई व्यक्ति अब पट्टे की मांग कर रहा है तो उसे भी प्री कैंप मानते हुए पट्टा जारी कर दिया जाए।
ज्ञातव्य रहे कि आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों पर सर्वोच्च न्यायालय और राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करना अब अधिकारियों की मजबूरी हो गई है। मंत्री के आदेशों से आने वाले समय में आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के डीएलबी के आदेशों की भी हवा निकलती दिख रही है और नये विवादों का खड़ा होना लगभग तय है।



