दिल्ली पुलिस के कांस्टेबिल सुभाष तोमर की मौत पर दिल्ली प्रदेश की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली पुलिस आमने-सामने है। इस बीच सुभाष तोमर प्रकरण में एक चश्मदीद के सामने आने से केंद्र की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस शक के दायरे में आ गये हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुभाष तोमर की मौत भीड़ की पिटाई से हुई जबकि चश्मदीद का कहना इस से ठीक उलट है। अगर चश्मदीद की माने तो तोमर भागते-भागते गिर गये थे और फिर नहीं उठ पाये! चश्मदीद ने पुलिसकर्मियों के साथ मिल कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उसका कहना है कि अस्पताल ले जाने तथा वहां उनका इलाज शुरू होने तक उनके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे।
उधर दिल्ली पुलिस ने सुभाष तोमर की मौत के बाद उन आठ लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है, जिन्हें पिछले दिनों अदालत ने जमानत दे दी थी। चश्मदीद ने अब दिल्ली पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उधर दिल्ली की महिलाओं ने बुद्धवार को महिला बंद आयोजित कर कामकाज का बहिष्कार किया।
उधर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा गत सोमवार को रिकॉर्ड कराये गये भाषण पर भी बबाल मच गया है। प्रधानमंत्री का भाषण रेकॉर्ड करने के लिये दूरदर्शन की टीम, आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस द्वारा प्रधानमंत्री आवास पर जाने वाले रास्तों पर लगाई गई रोक के चलते, समय पर नहीं पहुंच पाई थी और उनका भाषण एक निजी टीवी न्यूज ऐजेन्सी एएनआई ने रेकार्ड किया और बिना सम्पादन के ही प्रसारित कर दिया गया था!
प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने इस प्रसारण में राष्ट्र को जो सम्बोधन किया वह भी पूर्व में लिखा गया था और डॉ.मनमोहन सिंह ने अपने लिखित भाषण का कैमरे के सामने सिर्फ वाचन किया था। खुद प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और उनके प्रधानमंत्री कार्यालय की हड़बडाहट और गैरजुम्मेदारान लापरवाहीपूर्ण कृत्यों का खमियाजा दूर्दशन के दो कैमरामैन और इंजीनियरिंग शाखा के तीन कर्मचारियों को भुगतना पड़ा। उन्हें निलम्बित कर दिया गया और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हो गई है।
दिल्ली पुलिस, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृहमंत्री, गृह मंत्रालय और दिल्ली के उपराज्यपाल की अकर्मण्यता और लापरवाही के कारण दिल्ली का अवाम हैरान परेशान है और प्रशासन के हर स्तर पर लापरवाही अकर्मण्यता और राठौडी के चलते उसमें गहरी नाराजगी भी है। डॉ.मनमोहन सिंह की अगुआई वाली केंद्र सरकार की राठौडी के आगे यूपीए घटक दलों, कांग्रेस के नेता और अधिनस्त कर्तव्यनिष्ठ अफसर भी हैरत में हैं, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को इन सब की कोई चिन्ता नहीं है।
सारी परिस्थितियों से साफ है कि यह देश धीरे-धीरे आपातकाल के रास्ते पर चल निकला है। अब आपातकाल घोषित रूप से लागू होगा या अघोषित रूप से लागू होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।
उधर दिल्ली पुलिस ने सुभाष तोमर की मौत के बाद उन आठ लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है, जिन्हें पिछले दिनों अदालत ने जमानत दे दी थी। चश्मदीद ने अब दिल्ली पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उधर दिल्ली की महिलाओं ने बुद्धवार को महिला बंद आयोजित कर कामकाज का बहिष्कार किया।
उधर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा गत सोमवार को रिकॉर्ड कराये गये भाषण पर भी बबाल मच गया है। प्रधानमंत्री का भाषण रेकॉर्ड करने के लिये दूरदर्शन की टीम, आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस द्वारा प्रधानमंत्री आवास पर जाने वाले रास्तों पर लगाई गई रोक के चलते, समय पर नहीं पहुंच पाई थी और उनका भाषण एक निजी टीवी न्यूज ऐजेन्सी एएनआई ने रेकार्ड किया और बिना सम्पादन के ही प्रसारित कर दिया गया था!
प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने इस प्रसारण में राष्ट्र को जो सम्बोधन किया वह भी पूर्व में लिखा गया था और डॉ.मनमोहन सिंह ने अपने लिखित भाषण का कैमरे के सामने सिर्फ वाचन किया था। खुद प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और उनके प्रधानमंत्री कार्यालय की हड़बडाहट और गैरजुम्मेदारान लापरवाहीपूर्ण कृत्यों का खमियाजा दूर्दशन के दो कैमरामैन और इंजीनियरिंग शाखा के तीन कर्मचारियों को भुगतना पड़ा। उन्हें निलम्बित कर दिया गया और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हो गई है।
दिल्ली पुलिस, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृहमंत्री, गृह मंत्रालय और दिल्ली के उपराज्यपाल की अकर्मण्यता और लापरवाही के कारण दिल्ली का अवाम हैरान परेशान है और प्रशासन के हर स्तर पर लापरवाही अकर्मण्यता और राठौडी के चलते उसमें गहरी नाराजगी भी है। डॉ.मनमोहन सिंह की अगुआई वाली केंद्र सरकार की राठौडी के आगे यूपीए घटक दलों, कांग्रेस के नेता और अधिनस्त कर्तव्यनिष्ठ अफसर भी हैरत में हैं, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को इन सब की कोई चिन्ता नहीं है।
सारी परिस्थितियों से साफ है कि यह देश धीरे-धीरे आपातकाल के रास्ते पर चल निकला है। अब आपातकाल घोषित रूप से लागू होगा या अघोषित रूप से लागू होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।



