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देश में ट्रेड यूनियनों का भारत बंद पहिले दिन सफल रहा!

नई दिल्ली (ओएनएस) अपनी मांगों के समर्थन में 11 ट्रेड यूनियनों की बुधवार से हुई दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बैंकिंग और परिवहन सेवाओं पर व्यापक असर दिखा था। सुबह से ही इस बंद का व्यापक असर देखने को मिला था। हड़ताल का बुरा चेहरा भी सुबह से ही दिखने लग गया था।
पंजाब के अंबाला में तड़के एक ट्रेड यूनियन नेता की हत्या कर दी गई। एआईटीयूसी महासचिव गुरुदास दासगुप्ता ने बताया, कि एआईटीयूसी यूनियन के कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह की अज्ञात लोगों ने अंबाला बस स्टैंड के करीब चाकू घोपकर हत्या कर दी। हड़ताल के बावजूद वे लोग डिपो से बस निकलवाना चाहते थे। हत्या की निंदा करते हुए दासगुप्ता ने कहा कि इस तरह के जघन्य हमले के बाद भी हड़ताल जारी रहेगी।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुछ हड़ताली ऑटो ड्राइवर अपने एक साथी को पीटते हुए नजर आए। यह ऑटो ड्राइवर किसी सवारी को लेकर जा रहा था, जिसके बाद बंद समर्थकों ने उसे रोका और उसके साथ मारपीट की। दिल्ली आ रहे यात्रियों को बंद से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें स्टेशन से अपने घरों तक जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं। जो ऑटो या टैक्सी वाले सवारी ले जाने को राजी भी होते हैं, वे अनाप-शनाप पैसों की मांग कर रहे हैं।
इस बार सरकार पर हमला बढ़ती महंगाई के अलावा दिहाड़ी मजदूरों की खराब हालत और पेंशन जैसी मांगों को लेकर है। इसके अलावा मजदूर संगठन श्रम कानूनों की अनदेखी का भी आरोप लगा रहे हैं। इन लोगों का दावा है कि बैंक, बीमा, बिजली और माइनिंग सेक्टर समेत कई क्षेत्रों के 10 करोड़ से ज्यादा लोग दो दिन की इस हड़ताल में शामिल होंगे।
हालांकि प्रधानमंत्री ने मजदूर संगठनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की थी, लेकिन मजदूर संगठनों ने इसे नहीं माना। उधर, कांग्रेस भी मजदूर संगठनों के आक्रामक रुख से दबाव में है। कांग्रेस से जुड़ी ट्रेड यूनियन इंटक के नेता कह रहे हैं कि अगर जनता के साथ खड़े नहीं हुए, तो अगले चुनावों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार ने गत मंगलवार को फिर से ट्रेड यूनियनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की थी! उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि हड़ताल से 15,000 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान हो सकता है।
सरकार ने रिजर्व बैंक सहित सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल में शामिल न हों। सरकार का कहना है कि बैंक कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा और सुविधाओं को देखते हुए उनके इस हड़ताल में शामिल होने की कोई वजह नहीं बनती है। यूनियनों ने अपनी 10 मांगें पेश की हैं। इनमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत, श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करना, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश बंद करना और न्यूनतम मजदूरी 10,000 रुपये मासिक करना शामिल हैं।
केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ सरकार ने कोई काम नहीं कोई वेतन नहीं की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भी सभी कर्मचारियों का सकरुलर जारी कर कार्यालय में उपस्थित होने को कहा है, अन्यथा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। माकपा-सीटू की श्रम इकाई ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस धमकी को गैर-कानूनी करार दिया है।
राजस्थान में राजस्थान स्टेट रोड़वेज में चक्का जाम सफल रहा। रोड़वेज की 4400 बसें सड़क पर नहीं उतरी! वहीं दिल्ली में ऑटोरिक्षा और टैक्सियां सड़क से नदारत रही।

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