जयपुर (ओएनएस) चार दिवारी क्षेत्र में गैर कानूनी अवैध कॉमशियल काम्प्लेक्सों का निर्माण जयपुर नगर निगम के अफसरों और कारिंन्दों की मिलीभगत से तेजी से हो रहा है। कोढ़ में खाज यह है कि इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के शहर जिला पदाधिकारियों और उनके छुट्टभैय्या चमचों की गहरी मिलीभगत भी उजागर होती जा रही है।
जयपुर नगर निगम से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के अनुसार गैर कानूनी तरीके से अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने वाले बिल्डर और भू-माफिया पहिले तो आवासीय स्थल बनाने के लिये जयपुर नगर निगम की भवन-मानचित्र समिति में स्वीकृति हेतु आवेदन करते हैं और स्वीकृति मिलते ही गैर कानूनी एवं अवैध तरीके से जयपुर नगर निगम के अफसरों और कारिंदों के साथ मिलीभगत कर अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की कार्यवाही को अन्जाम देते हैं।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन में तो भू-माफियाओं के हौंसले इतने बढ़ गये हैं कि वे जयपुर नगर निगम के अफसरों ओर कारिंन्दों के साथ मिलीभगत कर बिना इजाजत तामीर गैर कानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने में जुटे हैं।
ऑल इण्यिा फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने यहां बताया कि हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन में हो रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण के बारे में उन्होंने खुलासा किया था, लेकिन जोन के अफसर और कारिंदे मामलों को दबा कर बैठ गये हैं।
फारवर्ड ब्लाक ने जयपुर नगर निगम की मेयर, सीईओ और हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन के आयुक्त, राजस्व अधिकारी एवं कनिष्ट अभियन्ता से सवाल किया है कि वे राजस्थान के नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन सचिव गुरदयाल सिंह संधु द्वारा जारी प्रपत्र क्रमांक प.10 (54) नविवि/3/2005 पार्ट दिनांक 13 जून, 2012 में उल्लेखित आदेशों का क्यों जानबूझ कर उलंघन कर रहे हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि-आवासीय भूखण्डों पर बिना पूर्वानुमति के गैर आवासिय उपयोग किसी दशा में नहीं होने दिया जाये। इसके लिये नगरीय निकायों के संबंधित प्रवर्तन अधिकारी/जोन अधिकारी/नगर पालिका अधिकारी उत्तरदायी होंगे एवं सम्बन्धित संस्था के कार्यालय अध्यक्ष का भी पर्यवेक्षकीय उत्तरदायित्व होगा। यदि बिना स्वीकृति के आवासीय भूखण्ड का उपयोग गैर आवासीय प्रयोजनार्थ किया जाता है तो उसे रोका जाकर भवन को सील किये जाने की कार्यवाही की जायेगी तथा भूखण्ड के बाहर नगरीय निकाय द्वारा एक पट्टिका लगवायी जायेगी जिस पर अंकित होगा ''यह भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र अनाधिकृत/अवैध निर्माण घोषित किया गया है। समस्त आमजन को सूचित किया जाता है कि इस भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र को अथवा किसी भाग को क्रय अथवा उपयोग नहीं करें।ÓÓ संबंधित नगर निकाय का नाम।
अब मेयर साहिबा, सीईओ तथा हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन आयुक्त बतायें कि नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन सचिव के उक्त आदेशों-निर्देशों की क्यों पालन नहीं हो रहा है? बताओ हुजूरों!
जयपुर नगर निगम से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के अनुसार गैर कानूनी तरीके से अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने वाले बिल्डर और भू-माफिया पहिले तो आवासीय स्थल बनाने के लिये जयपुर नगर निगम की भवन-मानचित्र समिति में स्वीकृति हेतु आवेदन करते हैं और स्वीकृति मिलते ही गैर कानूनी एवं अवैध तरीके से जयपुर नगर निगम के अफसरों और कारिंदों के साथ मिलीभगत कर अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की कार्यवाही को अन्जाम देते हैं।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन में तो भू-माफियाओं के हौंसले इतने बढ़ गये हैं कि वे जयपुर नगर निगम के अफसरों ओर कारिंन्दों के साथ मिलीभगत कर बिना इजाजत तामीर गैर कानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने में जुटे हैं।
ऑल इण्यिा फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने यहां बताया कि हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन में हो रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण के बारे में उन्होंने खुलासा किया था, लेकिन जोन के अफसर और कारिंदे मामलों को दबा कर बैठ गये हैं।
फारवर्ड ब्लाक ने जयपुर नगर निगम की मेयर, सीईओ और हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन के आयुक्त, राजस्व अधिकारी एवं कनिष्ट अभियन्ता से सवाल किया है कि वे राजस्थान के नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन सचिव गुरदयाल सिंह संधु द्वारा जारी प्रपत्र क्रमांक प.10 (54) नविवि/3/2005 पार्ट दिनांक 13 जून, 2012 में उल्लेखित आदेशों का क्यों जानबूझ कर उलंघन कर रहे हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि-आवासीय भूखण्डों पर बिना पूर्वानुमति के गैर आवासिय उपयोग किसी दशा में नहीं होने दिया जाये। इसके लिये नगरीय निकायों के संबंधित प्रवर्तन अधिकारी/जोन अधिकारी/नगर पालिका अधिकारी उत्तरदायी होंगे एवं सम्बन्धित संस्था के कार्यालय अध्यक्ष का भी पर्यवेक्षकीय उत्तरदायित्व होगा। यदि बिना स्वीकृति के आवासीय भूखण्ड का उपयोग गैर आवासीय प्रयोजनार्थ किया जाता है तो उसे रोका जाकर भवन को सील किये जाने की कार्यवाही की जायेगी तथा भूखण्ड के बाहर नगरीय निकाय द्वारा एक पट्टिका लगवायी जायेगी जिस पर अंकित होगा ''यह भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र अनाधिकृत/अवैध निर्माण घोषित किया गया है। समस्त आमजन को सूचित किया जाता है कि इस भूमि/भवन परिसर/क्षेत्र को अथवा किसी भाग को क्रय अथवा उपयोग नहीं करें।ÓÓ संबंधित नगर निकाय का नाम।
अब मेयर साहिबा, सीईओ तथा हवामहल जोन पूर्व और पश्चिम, विद्याधर नगर जोन, मोतीडूंगरी और आमेर जोन आयुक्त बतायें कि नगरीय विकास, आवास एवं स्वायत्त शासन सचिव के उक्त आदेशों-निर्देशों की क्यों पालन नहीं हो रहा है? बताओ हुजूरों!



