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दुरूस्त करो पुलिस व जनसम्पर्क प्रशसन को!

राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में पिछले चार दिनों में कानून एवं व्यवस्था की बद्हाली का जो माहौल बना, उस में शायद आने वाले समय में प्रदेश में बनने वाली अराजक कानून और व्यवस्था की स्थिति का आभास होने लगा है। प्रदेश की राजधानी जयपुर के लालकोठी थाना, ब्रह्मपुरी थाना व रामगंज थाना क्षेत्रों में मामूली से विवादों ने जो अराजक रूप लिया उस पर हमें गम्भीरता से सिर्फ सोचना ही नहीं होगा, बल्कि गैरजुम्मेदार अराजक तत्वों से निपटने की पुख्ता रणनीति भी बनानी होगी!
प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बद् से बद्तर होती जा रही है। प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार अवाम को बताये कि राज्य के कौन से जिले में कानून और व्यवस्था की स्थिति अच्छी है। अगर प्रिंट मीडिया में साया हुए समाचारों की छह माह की कानून और व्यवस्था की स्थिति से जुडी कतरनों को इकठ्ठा किया जाये तो इतने भर से ही पुलिस प्रशासन की सारी कलई खुल जाती है।
हम याद दिलायें कि गहलोत सरकार की ओटीएस जयपुर में हुई चिंतन बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उवाच थे कि थाना स्तर पर बीट सिस्टम को मजबूत किया जायेगा! हर थाने में एक खूफिया अधिकारी नियुक्त यिका जायेगा और खुफिया अधिकारी और इलाके के बीट अधिकारियों के जरिये थाना क्षेत्र पर इलाके की सीएलजी कमेटियों, मोहल्ला कमेटियों के सहयोग से पूरी निगरानी रखी जायेगी, ताकि अपराधों का ग्राफ कम हो सके! क्या हुआ, चिंतन बैठक के इन वादों का? बतायें प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत!
हमारे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साहब ने प्रदेश के सूचना एवं जनसम्पर्क तंत्र को मजबूत करने का हांका भी लगाया था, लेकिन क्या हुआ? उनकी सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में आने वाले छोटे-मझौले समाचार पत्रों में छपी इबारत को पढऩे की फुरसत आज भी विभाग के अफसरों-कारिन्दों के पास नहीं है। डाक से आने वाले इन समाचार पत्रों को बिना देखे रद्दी के बोरों में भर दिया जाता है। इस ही तरह इस विभाग में छपने वाली पत्र-पत्रिकाओंं को पत्रकारों तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। पुलिस प्रशासन और सूचना तथा जनसम्पर्क विभाग किसी भी सरकार का आइना होते है। सरकार के कामकाज और उसकी अवाम पर पकड़ इन दो विभागों से ही परखी जाती है। लेकिन आज जो बद्हाल इन दोनों विभागों के हैं, शायद ही अन्य किसी विभाग के हों!
राज्य में विधानसभा चुनाव अगले साल अन्त तक होने हैं। हो सकता है कि लोकसभा चुनाव भी अगले साल हो जायें। ऐसी स्थिति में गहलोत सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिये कि पुलिस प्रशासन और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरूस्त करे।

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